गडकरी का मास्टरस्ट्रोक, हादसे में ₹1.5 लाख का इलाज, ‘राहवीर’ को ₹25 हजार

शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

देश में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों और गंभीर चोटों को कम करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 27 राज्यों के परिवहन मंत्रियों की मौजूदगी में आयोजित राष्ट्रीय बैठक में सड़क सुरक्षा और परिवहन सुधार से जुड़े कई अहम फैसलों की घोषणा की।

इस बैठक का फोकस साफ था—दुर्घटना के बाद त्वरित इलाज, पीड़ित को आर्थिक सुरक्षा और सिस्टम की जवाबदेही।

Cashless Treatment Scheme: अब इलाज के लिए जेब नहीं खुलेगी

सरकार ने निर्णय लिया है कि अब देश की किसी भी सड़क पर दुर्घटना होने पर पीड़ित को अधिकतम 7 दिन तक ₹1.5 लाख का कैशलेस इलाज मिलेगा। यह सुविधा सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में उपलब्ध होगी।

यह योजना पहले असम, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, चंडीगढ़ और पुडुचेरी में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू की गई थी, जहां इसके सकारात्मक नतीजे सामने आए। अब इसे पूरे देश में लागू किया जा रहा है।

‘Rahveer’ योजना: घायल को अस्पताल पहुंचाने पर इनाम

सड़क हादसों के बाद लोगों की मदद करने में हिचक के पीछे कानूनी डर एक बड़ी वजह रही है। इसे खत्म करने के लिए सरकार ने ‘राहवीर’ (Road Safety Hero) योजना को और मजबूत किया है।

अब कोई भी व्यक्ति अगर सड़क दुर्घटना में घायल को समय पर अस्पताल पहुंचाता है, तो उसे ₹25,000 की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे Good Samaritan culture को बढ़ावा मिलेगा और कीमती जानें बचेंगी।

Hit and Run मामलों में मुआवजा बढ़ा

बैठक में यह भी सामने आया कि हिट एंड रन मामलों में मुआवजा क्लेम की दर बेहद कम है। 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 1.85 लाख मामलों में से केवल 17% क्लेम ही दर्ज हो पाए।

इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने मुआवजा राशि बढ़ाने का फैसला किया है— गंभीर रूप से घायल: ₹50,000, मृत्यु के मामले में: ₹2 लाख, राज्यों को इस योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने और क्लेम प्रक्रिया को सरल बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

Zero Fatality Districts Program पर फोकस

सरकार ने देश के 100 सबसे अधिक दुर्घटना-प्रभावित जिलों की पहचान की है, जहां Zero Fatality Districts Program लागू किया जाएगा। इस कार्यक्रम के तहत जिला प्रशासन, पुलिस, ट्रांसपोर्ट विभाग और स्थानीय संस्थाओं के साथ मिलकर वैज्ञानिक तरीकों से दुर्घटनाओं में कमी लाई जाएगी।

नागपुर, उन्नाव और कामरूप जैसे जिलों में इस मॉडल से सड़क दुर्घटनाओं में मौतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।

Bus Safety: अब डिजाइन और क्वालिटी पर सख्ती

पिछले तीन महीनों में बस दुर्घटनाओं में 145 लोगों की मौत के बाद सरकार ने बसों की डिजाइन और सुरक्षा मानकों पर सख्त रुख अपनाया है।

संशोधित Bus Body Code के तहत—

  1. बसों का रजिस्ट्रेशन अब केवल Type Approval के बाद होगा
  2. स्लीपर कोच बसें केवल ऑटोमोबाइल कंपनियां ही बनाएंगी
  3. फायर डिटेक्शन सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट और ड्राइवर ड्राउजीनेस अलर्ट अनिवार्य होंगे

दिव्यांगजनों के लिए Accessible Transport

बैठक में यह निर्णय भी लिया गया कि अब सभी नई सिटी बसें Divyang-friendly होंगी। इनमें लो-फ्लोर डिजाइन, व्हीलचेयर रैंप, हाइड्रोलिक नी-लिंग सिस्टम और पकड़ने के लिए हैंडल अनिवार्य होंगे।

इसका उद्देश्य शहरी परिवहन को सभी वर्गों के लिए सुलभ बनाना है।

Motor Vehicle Act में बड़े बदलाव की तैयारी

सरकार आगामी संसद सत्र में Motor Vehicle Act में 61 संशोधन पेश करने की तैयारी में है। इन संशोधनों का मकसद सड़क सुरक्षा को मजबूत करना, नागरिक सेवाओं को सरल बनाना और नियमों को वैश्विक मानकों के अनुरूप करना है।

नितिन गडकरी की अगुवाई में सरकार का संदेश साफ है— सड़क हादसे किस्मत नहीं, सिस्टम की जिम्मेदारी हैं।
कैशलेस इलाज, राहवीर प्रोत्साहन और सख्त सुरक्षा मानकों के जरिए सरकार सड़क सुरक्षा को केवल नियम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्राथमिकता बना रही है।

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